सम्पूर्ण भारतवर्ष में रेहडी, पटरी, फेरी वाले तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के फुटपाथ व्यवसायियों के उत्थान सुरक्षा एवं कल्याण के लिए कार्य करना ।
रेहड़ी-पटरी एवं फेरी व्यवसायियों को स्वरोजगार, उद्यमिता, प्रशिक्षण एवं सुक्ष्म वित्त (Micro Finance) के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना ।
रेहड़ी-पटरी व फेरी वालों को कानूनी सहायता प्रदान करना जैसे अवैध बेदखली, उत्पीड़न, लाईसेन्स की समस्या आदि में सहयोग करना।
"स्ट्रीट वेंडर्स ( आजीविका संरक्षण एवं स्ट्रीट वेंडिग का विनियमन) अधिनियम, 2014 " तथा अन्य संबंधित कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जनजागरण एवं प्रयास करना ।
रेहड़ी-पटरी व फेरी वालों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर, योजनाएं, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का आयोजन करना ।
नगर निगमों, शहरी स्थानीय निकायों, गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ समन्वय करके रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) एवं शहरी विकास योजनाओं में शामिल कराना।
देश के विभिन्न क्षेत्रों में रेहड़ी-पटरी एवं फेरी व्यवसायियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर सर्वेक्षण, शोध एवं दस्तावेजीकरण करना।
रेहड़ी-पटरी व फेरी व्यवसायियों को उनके अधिकारो, कर्त्तव्यों एवं उपलब्ध सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने हेतु शिविर, कार्यशालाएं एवं रैतियों का आयोजन करना ।
स्वच्छता, पर्यावरण हितैषी विक्रय प्रणाली एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित एवं जिम्मेदार वेंडिंग (विक्रय) को बढावा देना ।
सभी रेहड़ी-पटरी और फेरी वालों को पहचान पत्र / प्रमाण पत्र जारी करना ।
के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु दान, सरकारी अनुदान CSR फंड एवं अन्य आर्थिक सहयोग प्राप्त करना एवं उनका उचित उपयोग करना ।